मुंबई कोरोना वायरस () की वजह से लॉकडाउन () में बहुत सारी कंपनियां एक अलग ही टेंशन में आ गई हैं। उन्हें डर है कि अगर लॉकडाउन 3 मई से आगे बढ़ा तो उनका इंश्योरेंस कवर (Insurance Cover) खत्म हो जाएगा। इंश्योरेंस कंपनियां याद दिला रही हैं कि क्लॉज के मुताबिक अगर कोई कंपनी 1 महीने से अधिक बंद रहती है तो उसका इंश्योरेंस कवर खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा है कि सिर्फ 3 मई तक के लिए ही छूट दी जाएगी, उसके बाद भी कंपनी बंद रही तो इंश्योरेंस कवर खत्म हो जाएगा। ये क्लॉज़ ‘unoccupied premises’ है, जो हर फायर में होता है। यह क्लॉज़ इसलिए बनाया गया है ताकि कंपनियां अपने प्लांट को खाली ना छोड़ें, जिससे नुकसान का डर अधिक होता है। हालांकि, इसमें लॉकडाउन की परिस्थिति का कोई जिक्र नहीं है। एक नेशनल रीइंश्योरेंस कंपनी ने कहा है कि जो प्लांट बंद हो गए हैं, वह अपने आप दोबारा कवर में शामिल नहीं होंगे, जब तक कि इंश्योरेंस कंपनी इसकी हामी नहीं भरती। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनियों ने अपने क्लांट्स से कहा है कि हो सकता है कि 3 मई के बाद भी सरकार कोविड-19 पर काबू पाने के लिए लॉकडाउन को बढ़ाए। इंश्योरेंस कंपनियों के मुताबिक ऐसी स्थिति में फिर से रिव्यू किया जाएगा। यह भी पढ़ें- 3 मई तक के लिए मिली है छूट इस पर मंगलवार को जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने साफ किया कि वह समझते हैं कि ऐसी स्थिति में बहुत से पॉलिसी होल्डर अपनी इंश्योरेंस कंपनियों को कवरेज के लिए सूचित नहीं कर पाए होंगे। इसलिए ये फैसला किया गया है कि सभी पॉलिसीहोल्डर को एक बार 3 मई तक के लिए छूट दी जाए। इंश्योरेंस कंपनियां नहीं बोल रहीं कुछ जब हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया ने जब किसी भी इंश्योरेंस कंपनी के सीईओ से इस पर बात करनी चाही, तो किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, क्योंकि वह अभी इंश्योरेंस रेगुलेटर इरडा (IRDAI) के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने ये जरूर कहा कि पॉलिसी के नियम और शर्तें इरडा की तरफ से तय की गई हैं, जिन्हें कोई कंपनी नहीं बदल सकती है। इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष संजय केडिया ने इरडा को एक पत्र लिखते हुए कहा है कि मौजूदा लॉकडाउन की स्थिति को ‘unoccupied premises’ की श्रेणी में नहीं रखना चाहिए, जिससे इंश्योरेंस कवर जाने का खतरा है। यह भी पढ़ें- काउंसिल की बात भी कंफ्यूजन वाली काउंसिल की तरफ से 3 मई तक का जो समय दिया गया है, उसे लेकर भी कंफ्यूजन है। वह सिर्फ फायर इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए है, जबकि ‘unoccupied premises’ का ये क्लॉज़ अन्य पैकेज में भी है। एक दूसरी चिंता की वजह ये भी है कि इंश्योरेंस कंपनियों ने कहा है कि अगर फैक्ट्रियों का इस्तेमाल बदलता है तो भी इंश्योरेंस कवर सीज़ हो जाएगा। बहुत सारी कंपनियों ने कोविड-19 की वजह से अपनी फैक्ट्रियों का इस्तेमाल बदल दिया है। कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां हैंड सैनिटाइजर्स बना रही हैं, कुछ टेक्सटाइल कंपनियां मास्क बना रही हैं और बाकी की कई कंपनियां वेंटिलेटर बनाने में लगी हुई हैं। इधर कुआं, उधर खाई एक पब्लिक सेक्टर की इंश्योरेंस कंपनी ने अपने क्लाइंट को बताया है कि अगर कंपनी में कुछ नहीं होता है तब तो इंश्योरेंस कवर खत्म हो ही जाएगी, लेकिन अगर लॉकडाउन का उल्लंघन कर के कंपनी को चलाया गया तो भी इंश्योरेंस कवर खत्म हो जाएगा। यानी इधर कुआं, उधर खाई वाली स्थिति है। एक ब्रोकर ने कहा है कि ये बहुत ही अजीब स्थिति है।
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